वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव भारत की स्थिति पर उठे सवाल, भारत नहीं रहा शक्तिशाली देश

नई दिल्ली :- दुनिया की ताकतवर देशों की ताजा वैश्विक सूची ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। इस रैंकिंग में भारत का शीर्ष दस से बाहर होना कई तरह के सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है जबकि चीन और रूस जैसे देश भी मजबूत स्थिति में हैं। वहीं सऊदी अरब को इस बार शीर्ष दस में जगह मिली है जिससे समीकरण और रोचक हो गए हैं।

यह रैंकिंग केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें आर्थिक मजबूती राजनीतिक प्रभाव कूटनीतिक पहुंच और वैश्विक नेतृत्व जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है। भारत के संदर्भ में देखा जाए तो देश इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है। फिर भी समग्र अंकों में मामूली अंतर ने उसे शीर्ष दस से बाहर कर दिया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है और वैश्विक बाजार में उसकी भूमिका मजबूत हुई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जाता है और कई वैश्विक मुद्दों पर मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई जाती है। इसके बावजूद कुछ संकेतक ऐसे रहे जिनमें अपेक्षित प्रदर्शन नहीं हो सका।

 

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ देशों ने ऊर्जा संसाधन तकनीकी निवेश और क्षेत्रीय प्रभाव के दम पर अपनी स्थिति बेहतर की है। यही कारण है कि प्रतिस्पर्धा पहले से अधिक तीखी हो गई है। भारत के लिए यह स्थिति आत्ममंथन का अवसर भी मानी जा रही है ताकि भविष्य की रणनीति को और मजबूत किया जा सके।

कुल मिलाकर यह रैंकिंग भारत की कमजोरी नहीं बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा की बढ़ती तीव्रता को दर्शाती है। आने वाले वर्षों में आर्थिक सुधार तकनीकी विकास और कूटनीतिक संतुलन के जरिए भारत फिर से शीर्ष देशों की सूची में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *