पटना (बिहार):- पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सामने आई एक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरपोर्ट परिसर में एक महिला यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह करीब चालीस मिनट तक तड़पती रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला दर्द से कराहती रही लेकिन समय पर कोई डॉक्टर या मेडिकल सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
घटना के दौरान सबसे अधिक विचलित करने वाला दृश्य तब सामने आया जब महिला के साथ मौजूद परिजनों ने एयरपोर्ट पर लगे माइक के जरिए मदद की गुहार लगाई। बार बार डॉक्टर बुलाने की अपील की गई लेकिन एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से तत्काल कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। आसपास मौजूद यात्री भी हैरान और परेशान नजर आए लेकिन उनके पास भी सीमित विकल्प थे।
बताया जा रहा है कि महिला को गंभीर स्वास्थ्य समस्या थी और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थान पर बुनियादी मेडिकल सुविधा का अभाव चौंकाने वाला है। करीब चालीस मिनट तक महिला जमीन पर तड़पती रही और आखिरकार उसकी हालत और बिगड़ गई। बाद में जब उसे अस्पताल ले जाया गया तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद यात्रियों और आम लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब एयरपोर्ट जैसी जगहों पर हजारों लोग रोजाना आते जाते हैं तो वहां इमरजेंसी मेडिकल टीम चौबीसों घंटे क्यों उपलब्ध नहीं रहती। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी की जिम्मेदारी पर भी उंगलियां उठाई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं। केवल आधुनिक इमारतें और सुविधाएं काफी नहीं होतीं बल्कि आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ और त्वरित चिकित्सा व्यवस्था भी जरूरी है। पटना एयरपोर्ट की यह घटना एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए और यात्रियों की जान की कीमत को गंभीरता से समझा जाए।