दिल्ली में देश के प्रमुख बुद्धिजीवियों के साथ संविधान और लोकतंत्र पर मंथन

नई दिल्ली :- नए वर्ष की शुरुआत नई ऊर्जा और नई सक्रियताओं के साथ हुई है। इसी क्रम में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक और गंभीर संवाद के लिए दिल्ली जाना पड़ा। यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं थी बल्कि देश के वर्तमान हालात और भविष्य की दिशा को समझने का अवसर बनी। देश के शीर्ष बुद्धिजीवियों और अनुभवी प्रशासकों के साथ संवाद के दौरान लोकतंत्र और संविधान को लेकर गहन विमर्श हुआ। इन चर्चाओं में आने वाले दौर की आहट साफ महसूस की गई और कई नए अनुभव सामने आए।

 

दिल्ली में जिन विशिष्ट व्यक्तित्वों से संवाद का अवसर मिला उनमें पूर्व गवर्नर नजीब जंग पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा, पूर्व अध्यक्ष उ0 प्र ० राज्यकर अधिकारी सेवा संघ सुनील वर्मा, प्रसिद्ध जन वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज, विचारक योगेंद्र यादव अविनाश और निर्भीक पत्रकार परांजय दास ठाकुरता शामिल रहे। ये सभी दिग्गज हस्तियां अत्यंत विनम्रता और शालीनता के साथ उपस्थित थीं। अपने अपने क्षेत्र के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं की स्वतंत्रता और नागरिकों की सजगता कितनी आवश्यक है।

 

इस संवाद में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि संविधान केवल एक किताब नहीं बल्कि देश की आत्मा है। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता जन अधिकारों की रक्षा और सत्ता से सवाल पूछने की संस्कृति को जीवित रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बिना जनभागीदारी के कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

इस यात्रा को और अधिक सार्थक बनाया विश्वविद्यालय के दौर के आंदोलनकारी साथी दीपक कबीर की उपस्थिति ने। पुराने संघर्षों की स्मृतियां और वर्तमान चुनौतियों पर हुई चर्चा ने भविष्य की रणनीतियों को नई दिशा दी।

दिल्ली की यह यात्रा कई अर्थों में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रही। यह संवाद केवल यहीं समाप्त नहीं होगा बल्कि आगे भी जारी रहेगा। आशा है कि एक संविधान सम्मत प्रगतिशील और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण के लिए सभी मित्रों और साथियों का सहयोग निरंतर बना रहेगा।

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