नई दिल्ली :- अंडर उन्नीस क्रिकेट विश्व कप के एक मुकाबले के बाद खेल भावना को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भारत और बांग्लादेश के बीच खेले गए मैच के बाद दोनों टीमों के कप्तानों ने आपस में हाथ नहीं मिलाया। आमतौर पर मैच समाप्त होने के बाद खिलाड़ी एक दूसरे से हाथ मिलाकर सम्मान और खेल भावना का परिचय देते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।
मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच तनाव साफ नजर आया। खेल के कुछ क्षणों में खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। इसी तनावपूर्ण माहौल का असर मैच के बाद भी दिखाई दिया। जब पुरस्कार वितरण और औपचारिकताओं का समय आया तब भारत और बांग्लादेश के कप्तान आमने सामने जरूर आए लेकिन उन्होंने हाथ मिलाने से परहेज किया। इसे अंडर उन्नीस विश्व कप जैसे बड़े मंच पर असामान्य माना जा रहा है।
क्रिकेट को जेंटलमैन गेम कहा जाता है जहां प्रतिस्पर्धा के साथ साथ सम्मान भी जरूरी माना जाता है। युवा स्तर के टूर्नामेंट में खिलाड़ियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे भविष्य के लिए आदर्श प्रस्तुत करें। ऐसे में नो हैंडशेक की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मैदान पर आक्रामकता ठीक है लेकिन मैच के बाद खेल भावना का पालन होना चाहिए।
इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों में खेल भावना को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं। यदि आचार संहिता का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित खिलाड़ियों या टीम पर कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं कुछ लोग इसे केवल भावनाओं का क्षण मान रहे हैं और इसे ज्यादा तूल न देने की बात कह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ प्रशंसक भारतीय टीम के समर्थन में नजर आए तो कुछ ने दोनों टीमों को संयम बरतने की सलाह दी। कुल मिलाकर इस घटना ने अंडर उन्नीस विश्व कप के रोमांच के बीच खेल भावना की अहमियत को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।