नई दिल्ली :- भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह मुकाबला बेहद निराशाजनक साबित हुआ। न्यूजीलैंड ने तीसरे और निर्णायक वनडे में भारत को 41 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2 1 से अपने नाम कर ली। यह हार इसलिए भी ज्यादा चुभने वाली रही क्योंकि भारत को अपने ही घर में 37 साल बाद वनडे सीरीज गंवानी पड़ी। विराट कोहली का शानदार 54वां शतक भी टीम के काम नहीं आ सका और जीत की उम्मीदें अधूरी रह गईं।
इस सीरीज में कुछ ऐसे कारण रहे जिन्होंने भारत को लगातार नुकसान पहुंचाया। सबसे पहला कारण रहा शीर्ष क्रम की अस्थिरता। शुरुआती बल्लेबाज बड़े स्कोर में बदलने में नाकाम रहे जिससे मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव आया। दूसरा बड़ा कारण रहा मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाजी। जरूरी समय पर रन गति नहीं बढ़ पाई और लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम पिछड़ती चली गई।
तीसरा कारण गेंदबाजी की धार में कमी रहा। भारतीय गेंदबाज शुरुआती विकेट निकालने में सफल नहीं रहे और न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को जमने का पूरा मौका मिला। डेथ ओवरों में अतिरिक्त रन देना भी भारी पड़ा। चौथा कारण फील्डिंग रही जहां कई आसान मौके हाथ से निकल गए। कैच छोड़ना और रन आउट के अवसर गंवाना मैच की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
पांचवां और अहम कारण रणनीतिक चूक मानी जा रही है। कप्तानी फैसलों और गेंदबाजी बदलावों पर सवाल उठे। गौतम गंभीर की कोचिंग में यह पहली बड़ी घरेलू नाकामी मानी जा रही है जिसने टीम प्रबंधन को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
इस हार ने साफ कर दिया है कि केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन से मैच नहीं जीते जाते। टीम को एकजुट होकर हर विभाग में सुधार करना होगा। आने वाले समय में भारतीय टीम के सामने खुद को फिर से साबित करने की बड़ी चुनौती होगी ताकि घर में दोबारा ऐसी शर्मनाक स्थिति न बने।