चंडीगढ़ (पंजाब):- पंजाब में निजी अस्पतालों की मनमानी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। हाल ही में सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जहां मात्र पांच सौ रुपये का टीका मरीज को सात हजार पांच सौ रुपये में बेचा गया। इस घटना के बाद आम लोगों में आक्रोश है और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज को एक जरूरी टीका लगाया गया। बाद में जब बिल सामने आया तो परिजनों के होश उड़ गए। टीके की वास्तविक कीमत बाजार में बेहद कम है लेकिन अस्पताल ने उसे कई गुना महंगे दाम पर वसूल किया। परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कीमतों में भारी अंतर पाया गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों से मनमाने तरीके से पैसे वसूलना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऐसे मामले बार बार सामने आ रहे हैं। इलाज के नाम पर डर और मजबूरी का फायदा उठाकर मरीजों से भारी रकम वसूली जाती है। इससे आम जनता का भरोसा चिकित्सा व्यवस्था से उठता जा रहा है।
राज्य में पहले भी निजी अस्पतालों पर अधिक शुल्क वसूलने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन ठोस कार्रवाई कम ही देखने को मिली है। यही वजह है कि लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब इन पर लगाम लगेगी। सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से पारदर्शी सिस्टम लागू करने की मांग की है।
आम नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं बल्कि सेवा का क्षेत्र है। सरकार को चाहिए कि निजी अस्पतालों की दरें तय करे और नियमित जांच सुनिश्चित करे। जब तक सख्त नियम और कार्रवाई नहीं होगी तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे और मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ता रहेगा।