कनाडा :- विश्व आर्थिक मंच दावोस में कनाडा के प्रधानमंत्री के बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब दुनिया में किसी एक देश की चौधराहट नहीं चलेगी और अमेरिका का वर्चस्व धीरे धीरे खत्म हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और कई नए देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत भूमिका निभा रहे हैं।
कनाडाई प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया बहुध्रुवीय बन चुकी है। अब फैसले केवल वाशिंगटन से तय नहीं होंगे बल्कि एशिया यूरोप अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की आवाज भी उतनी ही अहम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक देश के दम पर नहीं बल्कि साझेदारी और सहयोग से ही संभव है।
उन्होंने आर्थिक शक्ति के बदलते केंद्रों का जिक्र करते हुए कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब केवल बाजार नहीं रहीं बल्कि नीति निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। टेक्नोलॉजी ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में कई देश आत्मनिर्भर बन रहे हैं जिससे पुरानी शक्ति संरचना कमजोर पड़ रही है। उनका इशारा साफ तौर पर अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव की ओर था।
दावोस में मौजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि मौजूदा वैश्विक हकीकत का प्रतिबिंब है। यूक्रेन युद्ध मध्य पूर्व तनाव और वैश्विक आर्थिक मंदी ने दुनिया को यह समझा दिया है कि एकतरफा नेतृत्व अब कारगर नहीं है। देशों को आपसी सम्मान और बराबरी के आधार पर आगे बढ़ना होगा।
कनाडा ने खुद को एक संतुलित और सहयोगी शक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है जहां सभी देशों को समान अवसर और सम्मान मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई देश दबदबा कायम रखने की कोशिश करेगा तो दुनिया और ज्यादा बंटेगी।
कुल मिलाकर दावोस से दिया गया यह संदेश स्पष्ट है कि वैश्विक राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। अब अमेरिका केंद्रित व्यवस्था की जगह साझा नेतृत्व और बहुध्रुवीय दुनिया की बात हो रही है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और गहराता नजर आ सकता है।