Governor’s address कर्नाटक :- कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बुधवार को विधानसभा के संयुक्त सत्र में अपना अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्यपाल ने अपने फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में कई अनुचित बातें थीं।
विवाद की जड़
राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में राज्यपालों ने अपने अभिभाषण में सरकार की नीतियों की आलोचना की है या कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार किया है। कर्नाटक में भी ऐसा ही हुआ है, जहां राज्यपाल ने अभिभाषण के 11 अनुच्छेदों पर आपत्ति जताई है जिनमें केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की गई है।
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 176 के अनुसार, राज्यपाल को विधानसभा के संयुक्त सत्र में अभिभाषण देना अनिवार्य है। हालांकि, राज्यपाल को अभिभाषण में सरकार की नीतियों की आलोचना करने की अनुमति नहीं है।
राजनीतिक तनाव
राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर विवाद ने राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारामैया ने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक बताया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दी है।