लिथोग्राफी से बदलेगा भारत का भविष्य धौलेरा बनेगा तकनीकी शक्ति केंद्र

नई दिल्ली :- भारत के छोटे से शहर धौलेरा को लेकर बड़ी उम्मीदें जताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि यही शहर आने वाले समय में हॉलैंड के तकनीकी प्रभुत्व को चुनौती देगा। इसकी वजह है सेमीकंडक्टर उद्योग में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीक लिथोग्राफी। यह तकनीक आज दुनिया की सबसे अहम और रणनीतिक तकनीकों में से एक मानी जाती है।

 

लिथोग्राफी असल में एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए चिप्स के अंदर बेहद सूक्ष्म सर्किट बनाए जाते हैं। सेमीकंडक्टर चिप्स में अरबों ट्रांजिस्टर होते हैं और उन्हें बेहद कम जगह में फिट करने के लिए लिथोग्राफी का इस्तेमाल किया जाता है। जितनी बेहतर और आधुनिक लिथोग्राफी होगी उतनी ही तेज और शक्तिशाली चिप्स तैयार होंगी। यही कारण है कि यह तकनीक मोबाइल फोन कंप्यूटर रक्षा उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों की रीढ़ बन चुकी है।

 

अब तक इस क्षेत्र में हॉलैंड की कंपनियों का दबदबा रहा है। दुनिया की सबसे उन्नत लिथोग्राफी मशीनें वहीं बनती हैं और कई बड़े देश इन्हीं पर निर्भर हैं। लेकिन भारत अब इस निर्भरता को तोड़ने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। गुजरात का धौलेरा इसी रणनीति का केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और अत्याधुनिक तकनीकी ढांचे का विकास किया जा रहा है।

 

धौलेरा को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां बिजली पानी सड़क और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं विश्वस्तरीय होंगी। सरकार और निजी कंपनियों की साझेदारी से यहां चिप निर्माण से लेकर लिथोग्राफी से जुड़ी तकनीकों पर काम किया जाएगा। इसका मकसद केवल उत्पादन नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करना है।

 

अगर यह परियोजना सफल होती है तो भारत न सिर्फ अपनी जरूरतों के लिए चिप्स बना सकेगा बल्कि वैश्विक बाजार में भी एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरेगा। तब धौलेरा सच में एक छोटे शहर से बड़ी तकनीकी ताकत में बदल जाएगा और दुनिया को दिखाएगा कि भविष्य की तकनीक भारत में भी आकार ले सकती है।

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