नई दिल्ली :- UGC कानून को लेकर देशभर में विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में स्वर्गीय रमेश रंजन की मार्मिक पंक्तियां एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी पंक्तियां आज के हालात पर गहरा प्रहार करती हैं और आम आदमी की पीड़ा को शब्द देती हैं।
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा
राई लो या पहाड़ लो राजा
मैं अभागा सवर्ण हूँ मेरा
रौंया रौंया उखाड़ लो राजा”
यह पंक्तियां केवल कविता नहीं बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक सशक्त सवाल हैं।
UGC कानून को लेकर लोगों का मानना है कि यह शिक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए खतरा बन सकता है। छात्रों शिक्षकों और समाज के कई वर्गों में इसे लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में प्रसिद्ध कवि और वक्ता डॉ कुमार विश्वास ने भी इस कानून का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी एक वर्ग या सत्ता के अधीन नहीं होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना होता है न कि विभाजन पैदा करना।
डॉ कुमार विश्वास का मानना है कि इस तरह के कानून से युवाओं के भविष्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नीति को लागू करने से पहले व्यापक संवाद और सहमति जरूरी है। साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की भूमिका ऐसे समय में और भी अहम हो जाती है जब समाज किसी बड़े बदलाव से गुजर रहा हो।
सोशल मीडिया पर भी #UGC_RollBack ट्रेंड कर रहा है। लोग कविताओं विचारों और तर्कों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक और सामाजिक भी है। रमेश रंजन की पंक्तियां आज के दौर में फिर से जीवित हो उठी हैं और सत्ता से सवाल पूछ रही हैं।
कुल मिलाकर UGC कानून के खिलाफ उठ रही यह आवाज एक चेतावनी है कि शिक्षा और समाज से जुड़े फैसलों में संवेदनशीलता और संवाद अनिवार्य है। यदि समय रहते इन आवाजों को नहीं सुना गया तो असंतोष और गहरा हो सकता है।