Equity Regulations नई दिल्ली:- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समरसता को बढ़ावा देने के लिए जारी किए गए नए नियमों के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है। इन नियमों को लेकर कई छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने अपनी नाराजगी जताई है।
यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। हालांकि इन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है, जिसे लेकर विरोध हो रहा है राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इन नियमों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ये नियम असंतुलित हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। इसी तरह, कई छात्र संगठनों ने भी इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।
यूजीसी ने इन नियमों को उच्च शिक्षा में समरसता और समानता को बढ़ावा देने के लिए जारी किया है। आयोग का कहना है कि ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने में मदद करेंगे। हालांकि, विरोधियों का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों को कम करते हैं इस बीच कई राजनीतिक दलों ने भी इन नियमों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि इन नियमों को लेकर गलतफहमियां हैं और जल्द ही इनका समाधान किया जाएगा। वहीं कांग्रेस ने इन नियमों को वापस लेने की मांग की है।