महाराष्ट्र (मुंबई):- मुंबई पुलिस के 2009 बैच के कांस्टेबल विदिप जाधव उन नामों में से थे जिनकी पहचान शोर से नहीं कर्तव्य से बनती है। वे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निजी सुरक्षा अधिकारी थे। साथी सिपाही कहते हैं कि उनकी ड्यूटी घड़ी नहीं देखती थी। जब जिम्मेदारी होती थी तब थकान का कोई अर्थ नहीं रहता था।
अजित पवार का अपने अंगरक्षक पर गहरा भरोसा था। राजनीतिक दौरों और अभियानों के समय विदिप जाधव हर कदम साथ रहते थे। सुरक्षा केवल एक काम नहीं थी बल्कि विश्वास का रिश्ता था। कहा जाता है कि कई बार घर का बना खाना भी साथ बैठकर खाया गया। यह रिश्ता पद और शक्ति से ऊपर मानवीय सम्मान का था।
प्लेन क्रैश की दुखद घटना में विदिप जाधव शहीद हो गए। खबरों की सुर्खियां बड़े नाम पर टिकी रहीं। कैमरे सत्ता के इर्द गिर्द घूमते रहे। पर एक सिपाही का घर उजड़ गया। एक परिवार का सहारा टूट गया। माता पिता की उम्मीदें और बच्चों की मुस्कान एक झटके में थम गई।
इतिहास अक्सर राजा की मौत लिखता है। अंगरक्षकों की शहादत पन्नों के बीच खो जाती है। यह वही सच्चाई है जो हर बार दोहराई जाती है। वर्दीधारी का दर्द खबर बनने से पहले भूल जाता है। पर समाज की जिम्मेदारी है कि वह हर कुर्बानी को याद रखे।
विदिप जाधव की शहादत हमें यह याद दिलाती है कि सुरक्षा केवल बंदूक नहीं होती। यह निष्ठा साहस और त्याग का संगम होती है। सोशल मीडिया की आवाज जब आम लोगों से उठती है तब न्याय का रास्ता बनता है।
आज जरूरत है कि हम हर वर्दीधारी की कुर्बानी को सलाम करें। उनके परिवार के साथ खड़े हों। उनकी कहानी को साझा करें। ताकि आने वाली पीढ़ी जाने कि देश केवल बड़े नामों से नहीं बल्कि ऐसे सिपाहियों से सुरक्षित रहता है।
सलाम विदिप जाधव 💐