नई दिल्ली :- आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक संतुलित लेकिन स्पष्ट तस्वीर पेश की है। सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय इकोनॉमी धीरे धीरे पटरी पर लौट रही है और विकास की रफ्तार स्थिर बनी हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू मांग निवेश और सेवा क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। सरकार के लिए यह संकेत राहत देने वाला है कि सुधारों का असर जमीन पर दिखने लगा है।
सर्वेक्षण में राजकोषीय घाटे को लेकर सकारात्मक रुझान सामने आया है। केंद्र सरकार ने खर्च और आय के बीच संतुलन बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। टैक्स कलेक्शन में सुधार और पूंजीगत खर्च पर फोकस के कारण घाटे में धीरे धीरे कमी दर्ज की गई है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की नजर में भी भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
हालांकि सर्वेक्षण ने राज्यों को लेकर एक बड़ी चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक कई राज्य सरकारें फ्रीबीज की राजनीति के जाल में फंसती नजर आ रही हैं। मुफ्त बिजली पानी और अन्य योजनाओं पर बढ़ता खर्च लंबे समय में वित्तीय सेहत के लिए खतरा बन सकता है। इससे न सिर्फ राज्यों का कर्ज बढ़ेगा बल्कि विकास योजनाओं के लिए संसाधन भी सीमित हो सकते हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कल्याणकारी योजनाएं जरूरी हैं लेकिन उनका संतुलन और लक्ष्य आधारित होना उतना ही अहम है। बिना ठोस वित्तीय योजना के फ्रीबीज भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ डाल सकती हैं। राज्यों को राजस्व बढ़ाने और खर्च की प्राथमिकताएं तय करने की जरूरत है।
कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण 2026 यह संदेश देता है कि देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है लेकिन केंद्र और राज्यों दोनों को जिम्मेदार फैसले लेने होंगे। तभी टिकाऊ विकास और आर्थिक स्थिरता का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।