Welcome order नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर रोक लगा दी जो उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए थे। इस फैसले पर छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, जबकि अन्य छात्र संगठन जैसे कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और त्रिपुरा मोटर चालक संघ (टीएमसीपी) ने इसकी आलोचना की है।एसएफआई की नेता अदिति मिश्रा ने कहा, “यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है और यह उच्च जाति के लोगों के विशेषाधिकार को मजबूत करेगा। हमें लगता है कि यह नियम आवश्यक थे और हमें इसके लिए लड़ना होगा।”
दूसरी ओर, एबीवीपी के नेता राहुल झांसला ने कहा, “यह फैसला छात्रों के हित में है और हमें लगता है कि यह नियम विभाजनकारी थे।” यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों को जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ समितियां और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को “अस्पष्ट” और “दुरुपयोग की संभावना” वाले पाया और उन्हें रोक दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को मार्च में फिर से सुनवाई के लिए रखेगा और तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। छात्र संगठनों का कहना है कि यह फैसला उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ लड़ाई को प्रभावित करेगा।
क्या है यूजीसी के नए नियम?
यूजीसी के नए नियमों के अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों को निम्नलिखित करना होगा:
– जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ समितियां स्थापित करना
– शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना
– छात्रों और कर्मचारियों के लिए जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों आया?
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाई क्योंकि उन्हें लगा कि ये नियम अस्पष्ट हैं और दुरुपयोग की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को मार्च में फिर से सुनवाई के लिए रखेगा और तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे।
छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया क्या है?
छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। एबीवीपी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, जबकि एसएफआई और टीएमसीपी ने इसकी आलोचना की है।