Adani agrees : अमेरिकी अदालत में नोटिस स्वीकार करने पर बनी सहमति, 90 दिनों में देना होगा जवाब

Adani agrees /नई दिल्ली: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) द्वारा दायर नागरिक धोखाधड़ी मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। ताजा अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अडानी और उनके कानूनी दल ने अमेरिका में औपचारिक रूप से कानूनी नोटिस (Summons) स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की है। इस सहमति के बाद अब उन्हें आरोपों का जवाब देने के लिए 90 दिनों का समय मिलेगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2024 में तब शुरू हुआ जब अमेरिकी नियामक SEC ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर आरोप लगाया कि उन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के लिए निवेशकों से धन जुटाते समय गलत और भ्रामक जानकारी दी थी। SEC का दावा है कि कंपनी ने अमेरिकी निवेशकों को अंधेरे में रखकर एक विशाल सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 265 मिलियन डॉलर (करीब 2,200 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने की योजना बनाई थी।

प्रक्रियात्मक बाधाओं का अंत

पिछले 14 महीनों से यह मामला प्रक्रियात्मक उलझनों में फंसा हुआ था। SEC ने आरोप लगाया था कि भारतीय कानून मंत्रालय के माध्यम से नोटिस भेजने की उनकी कोशिशें बार-बार तकनीकी आधार पर विफल हो रही थीं। हाल ही में SEC ने अदालत से अनुमति मांगी थी कि वे ईमेल के जरिए समन भेज सकें।

30 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट में दाखिल एक संयुक्त आवेदन में अडानी के अमेरिकी वकीलों और SEC ने सूचित किया कि प्रतिवादी अब सीधे अपने वकीलों के माध्यम से नोटिस स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। इससे न्यायाधीश को अब समन भेजने के तरीके पर अलग से फैसला सुनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आगे क्या होगा? (90 दिनों की समय सीमा)

अदालत द्वारा इस समझौते को मंजूरी मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी:

* 90 दिन का समय: गौतम और सागर अडानी के पास आरोपों का जवाब देने या मामले को खारिज करने (Motion to Dismiss) की याचिका दायर करने के लिए 90 दिन होंगे।

* SEC का पक्ष: इसके बाद SEC को 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करानी होगी।

* अंतिम जवाब: अडानी समूह के पास SEC की आपत्ति पर जवाब देने के लिए अतिरिक्त 45 दिन होंगे।

अडानी समूह का स्टैंड

अडानी समूह ने शुरू से ही इन आरोपों को “निराधार” और “भ्रामक” बताया है। कंपनी का कहना है कि वे अमेरिकी कानूनों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और अदालत में अपनी बात मजबूती से रखेंगे। अडानी ग्रीन एनर्जी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि कंपनी स्वयं इस कानूनी कार्यवाही का हिस्सा नहीं है बल्कि यह व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों के खिलाफ एक नागरिक मामला (Civil Case) है।

बाजार पर प्रभाव

इस खबर का निवेशकों पर मिश्रित प्रभाव देखा गया है। कानूनी अनिश्चितता के कारण पिछले सप्ताह अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई थी लेकिन अब मामले में स्पष्ट प्रक्रियात्मक प्रगति दिखने से बाजार को उम्मीद है कि यह कानूनी विवाद जल्द ही किसी तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचेगा।

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