9 फरवरी 2026 को आयोजित किया जाएगा उत्तर प्रदेश विधानसभा का प्रथम सत्र, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मिलेगी नई गति

लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधानसभा के वर्ष 2026 के प्रथम सत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। राज्यपाल द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार यह सत्र सोमवार नौ फरवरी 2026 को प्रातः ग्यारह बजे से लखनऊ स्थित विधान भवन में आरंभ होगा। यह सत्र न केवल संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि जनहित से जुड़े अनेक विषयों पर सार्थक चर्चा का मंच भी बनेगा।

विधानसभा का प्रत्येक सत्र लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इसमें जनप्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सदन के समक्ष रखते हैं और सरकार से समाधान की अपेक्षा करते हैं। प्रथम सत्र होने के कारण इस बैठक में वर्ष 2026 के लिए नीतिगत दिशा तय होने की संभावना है। विकास रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के लिए विधानसभा सत्र का विशेष महत्व है। यहां लिए गए निर्णय करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इस सत्र में सरकार अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर सकती है और विपक्ष अपनी भूमिका निभाते हुए जनहित के सवाल उठा सकता है। स्वस्थ बहस और सकारात्मक संवाद से लोकतांत्रिक मूल्यों को बल मिलता है।

विधान भवन लखनऊ में होने वाला यह सत्र प्रशासनिक तैयारी की दृष्टि से भी अहम है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर तकनीकी सुविधाओं तक सभी स्तरों पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। मीडिया और आम जनता की निगाहें भी इस सत्र पर टिकी रहती हैं।

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह प्रथम सत्र राज्य के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य के लिए दिशा निर्धारित करने वाला माना जा रहा है। जनता को उम्मीद है कि उनके प्रतिनिधि जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे और प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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