Assam poll असम:- असम में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई में भाजपा ने ध्रुवीकरण और जन-लप्रिय योजनाओं के सहारे अपनी जीत का रास्ता बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही बातचीत अभी भी अधर में है जिससे विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ध्रुवीकरण की राजनीति
सरमा ने हाल ही में बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों को लेकर दिए गए अपने बयान से विवाद खड़ा कर दिया है जिसे कई लोगों ने ध्रुवीकरण की कोशिश के रूप में देखा है। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा को तीसरी बार सत्ता में आना है तो असम में घुसपैठ को रोकना होगा। इस बयान को असम के स्थानीय लोगों की भावनाओं को भड़काने वाला माना जा रहा है खासकर उन लोगों के बीच जो बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ हैं।
विपक्ष की चुनौतियाँ
विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस और रायजोर दल के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं हो पा रही है। कांग्रेस ने रायजोर दल को तीन सीटें देने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन रायजोर दल इससे संतुष्ट नहीं है। इस विवाद के कारण विपक्षी एकता को झटका लगा है जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।
जन-लप्रिय योजनाएँ
सरमा सरकार ने कई जन-लप्रिय योजनाएँ शुरू की हैं, जैसे कि बाबू असोनी योजना, जिसके तहत छात्रों को वित्तीय सहायता दी जा रही है, और उड़ान योजना, जिसके तहत महिलाओं को आर्थिक मदद दी जा रही है। इन योजनाओं के सहारे भाजपा वोटरों को लाने की कोशिश कर रही है।
चुनावी रणनीति
असम में भाजपा की चुनावी रणनीति ध्रुवीकरण और जन-लप्रिय योजनाओं पर आधारित है। विपक्षी दलों के बीच एकता की कमी और कांग्रेस की आंतरिक समस्याएँ भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। हालांकि, विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिशें जारी हैं, और अगर वे सफल होते हैं तो चुनावी मुकाबला रोचक हो सकता है। असम विधानसभा चुनाव 2026 में होने वाले हैं और राजनीतिक पार्टियों के बीच मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है।