सोनभद्र (उत्तर प्रदेश):- सोनभद्र जनपद के घोरावल तहसील सभागार में दिनांक 3 फरवरी 2026 को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल के चिकित्सा अधीक्षक सहित सभी संबंधित खंड विकास कार्यालयों के अधिकारी, कर्मचारी एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान प्रेजेंटेशन के माध्यम से फाइलेरिया रोग के कारण, इसके फैलने के तरीके, इससे होने वाली गंभीर समस्याएं, उपचार की सीमाएं तथा समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि फाइलेरिया एक कृमि जनित रोग है, जिसमें लक्षण प्रकट होने के बाद इसका कोई प्रभावी इलाज संभव नहीं है। ऐसे में इसकी रोकथाम ही सबसे बड़ा उपाय है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया की दवा साल में एक बार लगातार तीन वर्षों तक पूरे समाज द्वारा एक साथ सेवन करने से इस बीमारी का उन्मूलन किया जा सकता है। भारत सरकार ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए वर्ष 2027 को लक्ष्य वर्ष घोषित किया है, जिसके तहत देशभर में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
बैठक में यह भी सामने आया कि घोरावल तहसील के कुछ गांवों में फाइलेरिया की दवा को लेकर लोगों में भ्रम और प्रतिरोध बना हुआ है। इसे दूर करने के लिए संबंधित गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया, ताकि लोग दवा के महत्व को समझें और इसे स्वीकार करें।
अधिकारियों ने बताया कि फाइलेरिया का वाहक कुलेक्स मच्छर होता है, जो संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति में भी बीमारी फैला देता है। इसी कारण यह रोग धीरे-धीरे पूरे समाज के लिए अत्यंत घातक रूप ले सकता है।
बैठक में उप जिला अधिकारी आशीष त्रिपाठी, तहसीलदार प्रवीण कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक नरेंद्र सिंह सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को समय से पूरा करने का संकल्प लिया।