बजट का वो छिपा संदेश जिसने वैश्विक राजनीति में बदला खेल

नई दिल्ली :- केंद्रीय बजट को अक्सर टैक्स योजनाओं और आम आदमी से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इस बार बजट का एक हिस्सा ऐसा भी रहा जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा संदेश दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आर्थिक फैसलों के जरिए ऐसा दांव खेला जिसे सीधे तौर पर पाकिस्तान चीन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

बजट में जिस तरह से रक्षा उत्पादन स्वदेशी तकनीक और रणनीतिक उद्योगों पर जोर दिया गया उसने साफ कर दिया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहा। आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था का मतलब यह है कि भारत न तो पाकिस्तान की धमकियों से डरता है और न ही चीन के दबाव में आता है। घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ने से सीमाओं पर भारत की स्थिति मजबूत होगी और रणनीतिक स्वतंत्रता भी बढ़ेगी।

 

चीन के लिए यह बजट एक संकेत है कि भारत अब सप्लाई चेन पर उसकी निर्भरता कम कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देकर भारत ने यह दिखा दिया कि वह विकल्प तैयार कर चुका है। इससे चीन की आर्थिक पकड़ कमजोर होने की आशंका है।

 

वहीं अमेरिका की राजनीति खासकर ट्रंप जैसे नेताओं की संरक्षणवादी सोच के जवाब में भारत ने अपने बाजार को मजबूत बनाने पर फोकस किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग पर भारी निवेश यह बताता है कि भारत वैश्विक साझेदारी तो चाहता है लेकिन शर्तों पर समझौता नहीं करेगा।

 

पाकिस्तान के संदर्भ में बजट का संदेश और भी स्पष्ट है। आर्थिक मजबूती ही असली शक्ति है और भारत ने विकास के रास्ते को चुनकर यह दिखा दिया कि वह अस्थिरता नहीं बल्कि स्थिरता का प्रतीक है। मजबूत अर्थव्यवस्था के सामने खोखली बयानबाजी टिक नहीं पाती।

 

इस तरह बजट का यह छिपा पहलू केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि एक रणनीतिक घोषणा है। मोदी सरकार ने एक झटके में यह साफ कर दिया कि भारत अब अपने हितों को लेकर किसी के सामने झुकने वाला नहीं है।

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