आज के समय में छोटी सी बीमारी होते ही बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना आम बात हो गई है लेकिन यही आदत आने वाले समय में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि एंटीबायोटिक का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर को कमजोर कर देता है और दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। इस समस्या को एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है जो धीरे धीरे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है।
कल्पना कीजिए कि आप गंभीर रूप से बीमार हों और दवा लेने के बाद भी कोई सुधार न हो। ऐसी स्थिति में इलाज मुश्किल हो जाता है और संक्रमण जानलेवा भी बन सकता है। डॉक्टरों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह लोगों की गलत आदतें हैं जिन्हें समय रहते सुधारा जा सकता है।
पहली बात एंटीबायोटिक कभी भी खुद से शुरू न करें। हर बुखार सर्दी या खांसी में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती। दूसरी बात डॉक्टर द्वारा बताई गई पूरी खुराक जरूर लें। दवा बीच में छोड़ देने से बैक्टीरिया और ज्यादा मजबूत हो जाते हैं। तीसरी बात किसी और की बची हुई दवा का इस्तेमाल न करें क्योंकि हर बीमारी और हर मरीज अलग होता है।
चौथी अहम सलाह यह है कि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक लेने से बचें क्योंकि ये दवाएं वायरस पर असर नहीं करतीं। पांचवी और सबसे जरूरी बात बिना जांच और सलाह के बार बार दवा बदलना बेहद नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर अभी भी सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले समय में सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि लोग जागरूक बनें और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करें। आपकी थोड़ी सी समझदारी न सिर्फ आपकी बल्कि पूरे समाज की सेहत को सुरक्षित रख सकती है।