लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने संपत्ति का विवरण निर्धारित समयसीमा तक अपलोड न करने वाले 68 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों की जनवरी 2026 की सैलरी रोक दी है। यह वेतन फरवरी महीने में मिलना था लेकिन फिलहाल इसे जारी नहीं किया गया है।
सरकार की ओर से यह कार्रवाई मानव संपदा पोर्टल पर चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा अपलोड न करने के कारण की गई है। मुख्य सचिव द्वारा सभी विभागों के कर्मचारियों को 31 जनवरी 2026 तक की अंतिम समयसीमा दी गई थी। स्पष्ट निर्देश थे कि तय तारीख तक संपत्ति का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नियमों का पालन नहीं किया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस कार्रवाई से करीब 68 हजार 236 से अधिक राज्यकर्मी प्रभावित हुए हैं। इनमें विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। सरकार का साफ कहना है कि जब तक संबंधित कर्मचारी अपनी संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपडेट नहीं करेंगे तब तक उनकी सैलरी जारी नहीं की जाएगी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि संपत्ति विवरण सार्वजनिक और पारदर्शी होने से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि आय से अधिक संपत्ति रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर नजर रखी जा सके।
सरकार के इस फैसले से सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है। कई विभागों में कर्मचारी अब जल्द से जल्द पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करने में जुट गए हैं। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि आगे भी इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
योगी सरकार का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए अब कोई ढील नहीं होगी और पारदर्शिता ही शासन की पहली शर्त है।