गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश):- गाजियाबाद में सामने आई एक दुखद घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। तीन नाबालिग बहनों की असामयिक मौत से परिवार ही नहीं बल्कि पूरा शहर गहरे सदमे में है। इस मामले में मिले एक पत्र में लिखे शब्द सॉरी पापा आई एम रियली सॉरी ने पिता के साथ साथ हर संवेदनशील व्यक्ति के दिल को झकझोर दिया है।
जानकारी के अनुसार यह घटना एक रिहायशी परिसर में हुई जहां तीनों बहनें अपने परिवार के साथ रहती थीं। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर पुलिस पारिवारिक परिस्थितियों पढ़ाई का दबाव और मानसिक तनाव जैसे पहलुओं पर गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस मामले ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में पढ़ाई प्रतिस्पर्धा और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव बच्चों पर तेजी से बढ़ रहा है। कई बार बच्चे अपनी परेशानी माता पिता या किसी बड़े से साझा नहीं कर पाते और भीतर ही भीतर टूटते चले जाते हैं।
घटना के बाद स्थानीय लोग शोक में हैं और परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। स्कूल प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि घर और स्कूल दोनों जगह बच्चों से खुलकर बातचीत का माहौल होना चाहिए ताकि वे अपने मन की बात बिना डर के कह सकें।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समय रहते संवाद समझ और सहयोग ही ऐसी त्रासदियों को रोकने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है।