इंदौर से झकझोर कर देने वाला मामला आया सामने, SIR के चक्कर में एक व्यक्ति अपनी अंधी मां के साथ लगाता रहा ऑफिस के चक्कर

इंदौर (मध्यप्रदेश):- मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आई एक घटना ने मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया यानी एसआईआर को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक व्यक्ति को अपनी दृष्टिहीन मां के साथ महीनों तक हर सप्ताह एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया जबकि उसने समय पर सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे।

 

पीड़ित व्यक्ति का कहना है कि वह बार बार अधिकारियों को यह समझाने की कोशिश करता रहा कि कागजात पूरे हैं और पहचान में कोई गलती नहीं है। इसके बावजूद हर बार उसे नए कारण बताकर वापस भेज दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में उसकी बुजुर्ग और अंधी मां को भी साथ आना पड़ा जो खुद चलने फिरने में असमर्थ हैं। कार्यालय के बाहर इंतजार करते समय उनके चेहरे पर थकान और बेबसी साफ दिखाई देती रही।

 

इस मामले ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारों का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना किसी भी नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा असर डालता है। ऐसे मामलों में त्वरित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था लेकिन यहां प्रक्रिया उलझी और लंबी बनती चली गई।

 

स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्ष ने एसआईआर व्यवस्था को अव्यवस्थित बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर सवाल उठाए हैं। वहीं सत्तारूढ़ दल पर भी इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।

 

यह मामला सिर्फ एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि इसे एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि यदि सुधार प्रक्रियाएं पारदर्शी और जवाबदेह नहीं होंगी तो आम नागरिकों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था से डगमगा सकता है।

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