Aazad Effect दिल्ली:- उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले नागिना सांसद चंद्रशेखर आजाद की रैलियों में उमड़ी भीड़ ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनकी पार्टी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम), की बढ़ती लोकप्रियता ने भाजपा और विपक्षी दलों की चिंता बढ़ा दी है चंद्रशेखर आजाद की रैलियों में बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं खासकर युवा और दलित वर्ग के लोग। उनकी स्पीचें जो अक्सर भाजपा और विपक्षी दलों की आलोचना करती हैं ने युवाओं और दलितों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। आजाद की पार्टी ने हाल ही में कन्नौज, आगरा और संत कबीर नगर में रैलियां की हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए है।
पार्टी की रणनीति
आजाद समाज पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा और विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। भाजपा ने आजाद की रैलियों को “बबल” बताते हुए कहा है कि उनकी पार्टी का कोई भविष्य नहीं है। वहीं बसपा ने आजाद पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया है।
आज़ाद का प्रभाव
आजाद की बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनकी दलित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता है। उन्होंने हाल ही में यूजीसी गाइडलाइंस के खिलाफ आंदोलन किया था जिसे युवाओं और दलितों का समर्थन मिला था। आजाद की पार्टी ने इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्षी दलों की आलोचना की थी जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी है।