सोनभद्र (उत्तर प्रदेश):- सोनभद्र जिले के घोरावल ब्लाक अंतर्गत फाइलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के उद्देश्य से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम प्राथमिक विद्यालय शाहगंज में आयोजित हुआ जहां डीईसी कृमिनाशक और आइवरमेक्टिन दवा का सेवन कराकर अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व विद्यालय के प्रधानाध्यापक कांता प्रसाद एएनएम नीतू कनौजिया और आशा कार्यकर्ता गीता मिश्रा द्वारा किया गया।
इस अभियान के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया कि गर्भवती महिलाएं गंभीर रूप से बीमार रोगी और दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को यह दवा नहीं दी जाएगी। शेष सभी पात्र लोगों को वर्ष में एक बार यह दवा खिलाना अनिवार्य है ताकि फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव किया जा सके।
आशा कार्यकर्ता गीता मिश्रा ने उपस्थित लोगों को जानकारी देते हुए बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारी है। इसके कीटाणु शरीर में प्रवेश कर रात के समय रक्त वाहिनियों में सक्रिय हो जाते हैं और धीरे धीरे तंत्रिकाओं को कमजोर करते हैं। इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण सामने आने में दस से पंद्रह वर्ष का समय लग जाता है। जब तक रोग की पहचान होती है तब तक शरीर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह अभियान रावटसगंज और घोरावल क्षेत्र में चलाया जा रहा है। इसके तहत स्वास्थ्य कर्मी घर घर जाकर लोगों को अपनी मौजूदगी में दवा खिलाएंगे। लोगों से अपील की गई है कि वे दवा का सेवन अवश्य करें और अपने परिवार को हाथी पांव जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखें।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक रसोईया और स्कूली बच्चे भी मौजूद रहे और सभी ने अभियान को सफल बनाने में सहयोग का आश्वासन दिया।