नई दिल्ली :-देश की राजधानी दिल्ली से सामने आए आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ 15 दिनों के भीतर 807 लोगों के लापता होने की जानकारी ने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर रख दिया है। इनमें बड़ी संख्या नाबालिग लड़कियों और युवतियों की बताई जा रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
सूत्रों के मुताबिक लापता लोगों के मामलों में कई केस ऐसे हैं जिनमें अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। कुछ परिवारों का कहना है कि थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी जांच की रफ्तार बेहद धीमी रही। इससे लोगों में डर और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है। खास तौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
एनएचआरसी ने इस पूरे मामले को मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए पुलिस से पूछा है कि लापता लोगों की तलाश के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि गुमशुदा नाबालिगों के मामलों में कौन सी विशेष कार्रवाई की जा रही है और कितने मामलों में अब तक बरामदगी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में तेजी से बढ़ती आबादी सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल और संगठित गिरोह इस तरह की घटनाओं के पीछे बड़ी वजह हो सकते हैं। हालांकि बिना ठोस जांच के किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सभी मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और कई विशेष टीमें गठित की गई हैं। फिर भी 15 दिन में 807 लोगों का गायब होना यह संकेत देता है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी चूक है। अब सबकी नजर एनएचआरसी की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।