Fraud Case नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को कथित 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में बड़ी राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश दिया कि श्वेतांबरी भट्ट को तुरंत उदयपुर जेल से रिहा किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उदयपुर स्थित ‘इंदिरा आईवीएफ’ (Indira IVF) के संस्थापक अजय मुर्डिया की शिकायत से जुड़ा है। मुर्डिया ने आरोप लगाया था कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी ने उन्हें अपनी दिवंगत पत्नी की बायोपिक और अन्य फिल्म परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था। आरोप के अनुसार, आरोपियों ने लगभग 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की और कथित तौर पर फर्जी बिलों के जरिए धन का दुरुपयोग किया।
अदालत में हुई तीखी बहस
सुनवाई के दौरान विक्रम भट्ट की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला केवल फिल्मों के फ्लॉप होने से जुड़ा है और इसमें कोई आपराधिक इरादा नहीं था। रोहतगी ने कहा, “शिकायतकर्ता चाहता था कि उस पर फिल्में बनाई जाएं। अब फिल्में नहीं चलीं तो इसमें निर्देशक का क्या दोष? पूरे परिवार को जेल में डालना गलत है।”वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या आपराधिक मामलों का इस्तेमाल पैसा वसूलने के लिए किया जा रहा है। पीठ ने राजस्थान सरकार और शिकायतकर्ता अजय मुर्डिया को नोटिस जारी कर 19 फरवरी तक जवाब मांगा है।
67 दिनों बाद जेल से बाहर आएंगे
बता दें कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को दिसंबर 2025 में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था और वे पिछले 67 दिनों से उदयपुर की सेंट्रल जेल में बंद थे। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को जमानत की शर्तें तय करने और उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया है।