लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश विधानसभा में उस समय हलचल बढ़ गई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चर्चा के दौरान एक पुराना प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के एक पूर्व शिक्षा मंत्री ने क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के नाम को लेकर बड़ी भूल कर दी थी और उन्हें मशहूर शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां समझ लिया था। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए योगी ने इतिहास के सही ज्ञान की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को समझना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के महान क्रांतिकारियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्र वातावरण में सांस ले सकें। उन्होंने बताया कि राम प्रसाद बिस्मिल का नाम स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है और उनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं। सदन में मौजूद सदस्यों ने इस टिप्पणी को ध्यान से सुना और कई सदस्यों ने मेज थपथपाकर समर्थन भी जताया।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि इतिहास को सही रूप में पढ़ाना और समझना जरूरी है ताकि नई पीढ़ी भ्रम का शिकार न हो। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की बात करते हुए कहा कि पाठ्यक्रम में राष्ट्र के नायकों की सही जानकारी देना आवश्यक है। इस दौरान राजनीतिक माहौल भी गर्म रहा और पक्ष विपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक देखने को मिली।
सदन की कार्यवाही के दौरान यह प्रसंग चर्चा का केंद्र बना रहा और बाहर भी इसकी व्यापक चर्चा हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मुद्दे जनता को इतिहास के प्रति जागरूक करने का अवसर देते हैं। कुल मिलाकर यह घटना विधानसभा की कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में दर्ज हो गई और इसने सही जानकारी की अहमियत को फिर से रेखांकित किया।