भारत में नहीं दिखेगा फरवरी का वलयाकार सूर्य ग्रहण जानें क्यों खास है यह खगोलीय घटना

Suryagrahan in India :- सत्रह फरवरी को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण होने जा रहा है जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने इस प्रकार आता है कि सूर्य का मध्य भाग ढक जाता है और किनारों पर अग्नि जैसी चमक दिखाई देती है। इसे आम भाषा में रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य दिनचर्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लोग बिना किसी धार्मिक प्रतिबंध के अपने कार्य कर सकेंगे। हालांकि जिन देशों में यह दिखाई देगा वहां खगोलीय प्रेमियों के लिए यह अद्भुत दृश्य होगा।

खगोल विज्ञान के जानकार बताते हैं कि सूर्य ग्रहण पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है तब सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है। वलयाकार स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ा दूर होता है और सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता।

आने वाले दिनों में तीन मार्च को चंद्र ग्रहण भी लगेगा जो भारत में दिखाई देगा। उस दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल प्रभावी रहेगा और कई लोग पूजा पाठ तथा स्नान दान करेंगे।

ऐसी खगोलीय घटनाएं हमें ब्रह्मांड की अद्भुत व्यवस्था का अनुभव कराती हैं और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ाती हैं। यदि सुरक्षित उपकरण उपलब्ध हों तो ग्रहण को देखना एक यादगार अनुभव बन सकता है।

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