लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- विधान सभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने शिक्षक भर्ती और रिक्त पदों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। प्रस्तुत विवरण के अनुसार एक अप्रैल दो हजार बाईस से आठ जनवरी दो हजार छब्बीस तक कुल पांच हजार आठ सौ छप्पन अभ्यर्थियों के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की गई है। इसके साथ ही परिषदिय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के सीधे भर्ती के लगभग छियालीस हजार नौ सौ चवालीस पद अभी भी रिक्त बताए गए हैं। यह आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था में मानव संसाधन की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है।
सरकार से यह भी पूछा गया कि क्या शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए नए पद सृजित कर भर्ती परीक्षा कराने पर विचार किया जा रहा है। इस पर सरकार का जवाब नकारात्मक रहा और कहा गया कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक और शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इस बयान ने अभ्यर्थियों और शिक्षा से जुड़े वर्गों में नई चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के बावजूद नए पदों के सृजन से इनकार किया गया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिक्त पदों को शीघ्र भरना आवश्यक है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षक की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए स्पष्ट नीति की जरूरत है ताकि उन्हें रोजगार का अवसर मिल सके।
सरकार का तर्क है कि वर्तमान संसाधनों के आधार पर व्यवस्था संचालित की जा रही है और आवश्यकता अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि भविष्य में शिक्षा विभाग रिक्त पदों को भरने और भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए क्या कदम उठाता है। यह मुद्दा न केवल रोजगार बल्कि प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता से भी सीधे जुड़ा हुआ है और आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।