नई दिल्ली :- टेलीविजन के स्वर्णिम दौर में बच्चों के लिए कई ऐसे धारावाहिक आए जिन्होंने मनोरंजन के साथ साथ कल्पना और रोमांच की दुनिया को जीवंत कर दिया। इन्हीं में एक ऐसा शो भी था जिसमें जुगाड़ू चाचा नाम का किरदार अपनी चतुराई और अनोखे उपायों से खलनायकों को हर बार मात देता नजर आता था। उस समय के बच्चे हर कड़ी का बेसब्री से इंतजार करते थे और चाचा की नई तरकीबों को देखकर उत्साहित हो जाते थे।
इस धारावाहिक की खास बात यह थी कि इसमें हास्य और रोमांच का संतुलन था। जुगाड़ू चाचा सीमित संसाधनों में भी ऐसे उपाय निकालते थे जो दर्शकों को चकित कर देते थे। उनकी सादगी और बुद्धिमत्ता ने उन्हें घर घर में लोकप्रिय बना दिया। बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी इस किरदार से जुड़ाव महसूस करते थे क्योंकि कहानी में पारिवारिक भावनाओं को भी जगह दी गई थी।
धारावाहिक के प्रसारण के दौरान स्कूलों में बच्चे इसके संवाद दोहराते थे और खेल के दौरान चाचा की तरह समस्याओं का हल निकालने की कोशिश करते थे। यह शो केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसने बच्चों को रचनात्मक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी दी।
आज भी जब पुराने दिनों की चर्चा होती है तो जुगाड़ू चाचा का नाम जरूर लिया जाता है। यह किरदार उस दौर की मासूमियत और कल्पनाशीलता का प्रतीक बन चुका है और यादों में आज भी उतना ही ताजा है जितना अपने प्रसारण के समय था।