CAA petitions नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की सुनवाई की तारीख तय कर दी है। अब 5 मई से इसकी अंतिम सुनवाई शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 200 से अधिक याचिकाओं को सुनने के लिए यह तारीख तय की है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि 5 मई को याचिकाकर्ताओं की सुनवाई होगी, जबकि 6 मई को भी याचिकाकर्ताओं की सुनवाई जारी रहेगी। 7 मई को सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा, और 12 मई को याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाबी कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दो तरह की याचिकाएं हैं – एक असम और त्रिपुरा से जुड़ी हैं और दूसरी पूरे देश से जुड़ी हैं। बेंच ने कहा कि पहले पूरे देश से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई की जाएगी, और उसके बाद असम और त्रिपुरा से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई होगी।
सीएए के खिलाफ याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह अधिनियम मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि यह अधिनियम धार्मिक आधार पर नागरिकता देने का प्रयास है जो कि संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि सीएए का उद्देश्य उन लोगों को नागरिकता देना है जो पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह अधिनियम किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जो अपने देश में सुरक्षित नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि वह इस मामले में अपना जवाब दाखिल करेगी। सरकार ने कहा कि सीएए का उद्देश्य धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों को राहत देना है न कि किसी समुदाय के खिलाफ भेदभाव करना। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वह इस मामले में जल्द से जल्द फैसला सुनाएगी। बेंच ने कहा कि वह इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाएगी।