Japan PM टोक्यो:जापान की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने शुक्रवार को संसद में अपने पहले संबोधन के दौरान चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ‘दबाव की राजनीति’ (coercion) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जापान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अपनी सुरक्षा रणनीति में आमूल-चूल बदलाव करने जा रहा है।
प्रमुख बिंदु:
– चीन की चुनौती: ताकाइची ने कहा कि चीन पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में बलपूर्वक यथास्थिति बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के लिए “सबसे गंभीर और जटिल सुरक्षा वातावरण” करार दिया।
– सुरक्षा ओवरहॉल: प्रधानमंत्री ने इस साल जापान के तीन मुख्य सुरक्षा दस्तावेजों को संशोधित करने का संकल्प लिया। इसके तहत रक्षा बजट को जीडीपी के 2% तक बढ़ाने और रक्षा उपकरणों के निर्यात नियमों में ढील देने की योजना है।
-आर्थिक सुरक्षा: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए जापान अपनी ‘सप्लाई चेन’ को मजबूत करेगा। ताकाइची ने विदेशी निवेश की जांच के लिए अमेरिका की तर्ज पर एक विशेष समिति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी भूमि खरीद की समीक्षा करने का भी प्रस्ताव रखा।
-ताइवान और क्षेत्रीय स्थिरता: ताकाइची, जिन्हें अक्सर ‘आयरन लेडी’ और चीन के प्रति आक्रामक (Hawkish) नेता माना जाता है, ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति को जापान के अस्तित्व के लिए आवश्यक बताया।