Bridge collapse : 400 करोड़ का ब्रिज 5 साल में दूसरी बार गिरा, भ्रष्टाचार की खुली पोल

Bridge collapse जबलपुर(मध्य प्रदेश):- मध्य प्रदेश के जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग 45 पर स्थित एक रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा रविवार को अचानक गिर गया जिससे हाईवे पर आवागमन प्रभावित हो गया। यह ओवरब्रिज लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था और महज 5 साल पहले इसका निर्माण पूरा हुआ था।

ब्रिज का एक हिस्सा दिसंबर 2025 में भी गिर चुका था जिसके बाद इसकी मरम्मत का काम चल रहा था। लेकिन रविवार को दूसरा हिस्सा भी भरभराकर गिर गया जिससे यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने तुरंत ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया जिससे लंबा जाम लगने से बचा गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्रिज के निर्माण में गंभीर लापरवाही बरती गई थी जिससे यह स्थिति बनी। उनका कहना है कि निर्माण एजेंसी ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया था जिससे ब्रिज की गुणवत्ता प्रभावित हुई।

मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के संभागीय प्रबंधक राकेश मोरे ने बताया कि ब्रिज का निर्माण मेसर्स वागड़ इंफ्रा द्वारा किया गया था और इसकी मेंटेनेंस का काम ठेकेदार के खर्च पर चल रहा था। उन्होंने बताया कि निर्माण एजेंसी की दोष दायित्व अवधि समाप्त नहीं हुई इसलिए हैंडओवर का प्रश्न नहीं उठता। इस घटना के बाद निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और तकनीकी जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच टीम जल्द ही मौके पर पहुंचकर जांच करेगी और ब्रिज गिरने के कारणों का पता लगाएगी।

ब्रिज के निर्माण की कहानी

ब्रिज का निर्माण नवंबर 2015 में शुरू हुआ था और जनवरी 2020 में इसे पूर्ण घोषित किया गया था। 56 किलोमीटर लंबे मार्ग और फ्लाईओवर के निर्माण पर लगभग 391 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। लेकिन महज 5 साल में ब्रिज का दो बार गिरना साफ तौर पर घटिया निर्माण सामग्री और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

नागरिकों का आक्रोश

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। उनका कहना है कि निर्माण एजेंसी और अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। वे मांग कर रहे हैं कि निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और ब्रिज का दोबारा निर्माण किया जाए।

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