District Election नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जिन लोगों के घरों को ध्वस्त किया गया है वे अपने नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जिला चुनाव अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। यह फैसला लखनऊ के अकबर नगर में ध्वस्तीकरण के बाद लोगों को मतदाता सूची से बाहर किए जाने के मामले में आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिला चुनाव अधिकारी को इन लोगों की शिकायतों की जांच करनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि अगर जिला चुनाव अधिकारी की कार्रवाई से लोग संतुष्ट नहीं हैं तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अकबर नगर के निवासियों ने आरोप लगाया था कि उनके घरों को सितंबर 2023 में ध्वस्त कर दिया गया था जिसके बाद उन्हें मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उनके नाम 2002 से मतदाता सूची में शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला तथ्यात्मक जांच का है और इसे उच्च न्यायालय में ले जाना चाहिए। अदालत ने जिला चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया कि वे इन लोगों की शिकायतों की जांच करें और आवश्यक कार्रवाई करें।इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जो ध्वस्तीकरण के बाद मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। यह फैसला यह भी सुनिश्चित करता है कि लोगों के मतदान के अधिकार की रक्षा की जाए।
मुख्य बातें:
– सुप्रीम कोर्ट ने जिला चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे ध्वस्तीकरण से प्रभावित लोगों की शिकायतों की जांच करें।
– लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जिला चुनाव अधिकारी से संपर्क करने का निर्देश दिया गया है।
– अगर जिला चुनाव अधिकारी की कार्रवाई से लोग संतुष्ट नहीं हैं, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
– यह फैसला लखनऊ के अकबर नगर में ध्वस्तीकरण के बाद लोगों को मतदाता सूची से बाहर किए जाने के मामले में आया है।