Treat doctors मद्रास:- मद्रास हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अस्पताल डॉक्टरों को मजदूर या नियमित कर्मचारी नहीं मान सकते हैं। न्यायाधीश एन. आनंद वेंकटेश ने कहा कि डॉक्टर स्वतंत्र पेशेवर हैं और उन्हें अपनी सेवाएं देने से रोकना सार्वजनिक नीति के खिलाफ है।
यह फैसला एमआईओटी हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड और कार्डियोथोरैसिक सर्जन डॉ. बालारमन पलानीप्पन के बीच विवाद में आया है। डॉ. पलानीप्पन ने अपना अनुबंध समाप्त कर एपोलो हॉस्पिटल्स में शामिल हो गए थे, जिसके बाद एमआईओटी हॉस्पिटल्स ने उनके खिलाफ मध्यस्थता की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि अस्पताल सेवा-उन्मुख संस्थान हैं, न कि लाभ-उन्मुख व्यवसाय। न्यायाधीश ने कहा, “डॉक्टर अस्पतालों के बिना भी जीवित रह सकते हैं, लेकिन अस्पताल डॉक्टरों के बिना नहीं चल सकते हैं।” उन्होंने कहा कि अस्पताल डॉक्टरों को अपनी सेवाएं देने से रोकने के लिए गैर-प्रतिस्पर्धा और गैर-सॉलिसिटेशन क्लॉज का उपयोग नहीं कर सकते हैं।
कोर्ट ने एमआईओटी हॉस्पिटल्स पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और डॉ. पलानीप्पन को भुगतान करने का आदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि अस्पताल ने डॉक्टर के साथ अनुचित व्यवहार किया है और उनके पेशेवर स्वतंत्रता का उल्लंघन किया है। यह फैसला भारतीय चिकित्सा समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है और अस्पतालों को डॉक्टरों के साथ अनुबंध में गैर-प्रतिस्पर्धा और गैर-सॉलिसिटेशन क्लॉज का उपयोग करने से रोकने में मदद करेगा।