नई दिल्ली :- हाल ही में अंतरिक्ष मिशनों में सामने आई तकनीकी चुनौतियों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बार-बार रॉकेट परीक्षण या लॉन्च में दिक्कतें क्यों आती हैं। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने स्पष्ट किया है कि हर मिशन बेहद जटिल इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं से गुजरता है और छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े प्रभाव डाल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संभावित कारणों की गहन समीक्षा की जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के दौरे के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि किसी भी “साजिश” की बात आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है और जांच का उद्देश्य सभी संभावनाओं की निष्पक्ष पड़ताल करना है।
तकनीकी कारण क्या हो सकते हैं
विशेषज्ञ बताते हैं कि रॉकेट लॉन्च में ईंधन प्रणाली की सूक्ष्म गड़बड़ी इंजन के सेंसर में त्रुटि सॉफ्टवेयर सिंक्रोनाइजेशन समस्या या मौसम संबंधी कारक जैसे कारण सामने आ सकते हैं। अंतरिक्ष मिशन में हजारों घटक मिलकर काम करते हैं इसलिए हर लॉन्च से पहले और बाद में विस्तृत विश्लेषण किया जाता है।
जांच का मकसद
जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य के मिशन पूरी तरह सुरक्षित और सफल हों। यदि कहीं प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है तो उसे तुरंत लागू किया जाए। साथ ही सुरक्षा एजेंसियां यह भी देखती हैं कि कोई बाहरी हस्तक्षेप या साइबर जोखिम तो नहीं है।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समीक्षा अंतरिक्ष कार्यक्रम को और मजबूत बनाती है। भारत लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहा है और हर चुनौती से सीख लेकर भविष्य के मिशनों को बेहतर बनाया जाता है।