महाराष्ट्र :- महाराष्ट्र में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी को एक भयंकर धर्मसंकट का सामना करना पड़ रहा है। इस बार की राजनीतिक पिच बेहद जटिल बनी हुई है और कांग्रेस को दो बड़े नेताओं शरद पवार और उद्धव ठाकरे के लिए समर्थन देना पड़ सकता है जबकि खुद उसे इस सहयोग से सीधा कोई लाभ नहीं होने की स्थिति है।
राज्यसभा चुनाव में सफलता पाने के लिए आम तौर पर राजनीतिक दलों को सुनिश्चित बहुमत वाली संख्या की आवश्यकता होती है। लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा में सीटों के बँटवारे और गठबंधन की राजनीति के चलते कांग्रेस के सामने जटिल चुनौतियाँ खड़ी हो गयी हैं। पार्टी के पास पर्याप्त संख्या नहीं है जिससे वह बिना सहयोग के अपने प्रत्याशियों को जितवा सके। ऐसे में उसे एनसीपी के शरद पवार और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को समर्थन देना पड़ सकता है ताकि वे अपनी-अपनी चुनौतियों में विजय प्राप्त कर सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सहयोग कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन रहा है क्योंकि वह इन सहयोगों से अपनी राजनीतिक मांगों और एजेंडा को प्राथमिकता नहीं दे पा रही। परिणामस्वरूप कांग्रेस को लगता है कि वह दूसरों की मदद करके भी राजनीतिक लाभ अपने पक्ष में कर पाने में असमर्थ रहेगी। इससे पार्टी को अपने भविष्य की चुनाव रणनीतियों पर भी दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में यह चिंता देखी जा रही है कि यदि कांग्रेस को इस बार भी अपने सहयोगी दलों के लिए पांव फैलाना पड़ा और खुद कुछ हासिल न हुआ तो उसके विरोधियों को लोक में बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है। जनता और विपक्षी दल कांग्रेस की स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक समीकरण में और बदलाव भी संभव है।