बार-बार शिकायत करने से दिमाग की वायरिंग कैसे बदलती है? वैज्ञानिक वजह सरल भाषा में

Health updates :- बहुत से लोग दिनभर छोटी-छोटी चीजों पर शिकायत करते रहते हैं। कुछ लोगों को तो शिकायत करना अच्छा भी लगता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपके दिमाग पर क्या असर डाल सकती है? विज्ञान की भाषा में इस तरह की आदत आपके दिमाग की वायरिंग को बदल सकती है और सोचने के ढंग को प्रभावित कर सकती है।

जब भी आप किसी बात पर बार-बार नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं, आपका दिमाग उसी नकारात्मक सोच को बार-बार सक्रिय करता है। दिमाग में न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाएँ) एक-दूसरे से संपर्क करके नेटवर्क बनाते हैं। जब एक मार्ग बार-बार उपयोग होता है, तो वह और मजबूत हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे रोजाना एक रास्ते पर चलने से वह राह गहरी होती जाती है।

इसका मतलब यह है कि अगर आप रोज शिकायत करते हैं तो दिमाग की उन तंत्रिकीय राहों पर बार-बार सिग्नल जाते हैं जो नकारात्मक सोच से जुड़े होते हैं। धीरे-धीरे वही मार्ग “डिफ़ॉल्ट” बन जाता है और आपका दिमाग पहले नकारात्मक सोच की तरफ स्वाभाविक रूप से खिंचता है।

कुछ शोध बताते हैं कि लगातार नकारात्मक सोच और शिकायतों से तनाव हार्मोन बढ़ सकते हैं और मनचाहे सकारात्मक विचारों के लिए जगह कम हो सकती है। नतीजतन, छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करना भी मुश्किल लगने लगता है।

लेकिन अच्छी खबर यह है कि दिमाग की यह बदलती वायरिंग स्थायी नहीं है। जैसे-जैसे आप सकारात्मक सोच और समाधान-मुखी व्यवहार को अपनाते हैं, नए न्यूरल मार्ग बनते हैं और पुरानी नकारात्मक आदतें धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ती हैं।

अगर आप चाहते हैं कि आपका दिमाग सकारात्मक दिशा में काम करे तो छोटे-छोटे कदम मदद कर सकते हैं जैसे:

रोज कम से कम एक चीज़ के लिए आभार (थैंक्स) महसूस करना

समस्या के बजाय समाधान सोचने की कोशिश

नकारात्मक विचार आते ही उन्हें बदलने का अभ्यास

इस तरह धीरे-धीरे आपका दिमाग खुशियों और समाधान की तरफ अपने वायरिंग को ढाल सकता है और शिकायतों से मुक्त सोच विकसित कर सकता है।

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