समस्तीपुर (बिहार):- समस्तीपुर में आलोक की शादी में एक अनूठी बारात देखने को मिली। शहर की सड़कों पर न डीजे था, न लग्जरी गाड़ियां, बल्कि 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का कारवां निकला। देसी अंदाज में निकली बारात ने समस्तीपुर को लौटाए सुनहरे दिन
बदलते दौर में जहां शादियां चमक दमक और आधुनिक सजावट का प्रतीक बन चुकी हैं वहीं समस्तीपुर में एक शादी ने लोगों को पुराने समय की याद दिला दी। आलोक की बारात जब शहर की सड़कों पर निकली तो न डीजे की तेज धुन थी और न ही महंगी गाड़ियों की लंबी कतार। इसके बजाय बाइस सजी धजी बैलगाड़ियों का सुंदर कारवां सबका ध्यान खींच रहा था।
हर बैलगाड़ी को पारंपरिक तरीके से सजाया गया था। रंग बिरंगे कपड़े फूलों की मालाएं और ग्रामीण कला की झलक इस बारात को खास बना रही थी। बाराती भी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए जिससे माहौल पूरी तरह देसी रंग में रंग गया। राह चलते लोग रुककर इस अनोखे दृश्य को देखते रहे और कई लोगों ने इसे अपने मोबाइल में कैद किया।
इस देसी थीम वाली शादी का मकसद केवल अलग दिखना नहीं था बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ाव दिखाना भी था। गांव की संस्कृति और परंपराओं को सम्मान देने की यह पहल लोगों के दिल को छू गई। बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद उन्होंने ऐसी बारात देखी है जो उन्हें अपने युवावस्था के दिनों में ले गई।
आज के समय में जब शादियां दिखावे की होड़ में बदलती जा रही हैं तब इस पहल ने सादगी और संस्कृति का महत्व याद दिलाया। बैलगाड़ी की धीमी चाल और लोकगीतों की मधुर आवाज ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। यह शादी साबित करती है कि खुशी का असली रंग परंपरा और अपनापन में छिपा होता है।