Solar Imports वाशिंगटन:- अमेरिका ने भारतीय सौर उत्पादों पर 126% शुल्क लगाने का फैसला किया है जिससे भारतीय सौर उद्योग को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह फैसला भारतीय सौर उत्पादों पर सब्सिडी के आरोपों के बाद लिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, भारतीय सौर उत्पादों पर शुल्क लगाने का उद्देश्य अमेरिकी सौर उद्योग को बचाना है, जो भारतीय सौर उत्पादों की कम कीमतों के कारण प्रभावित हो रहा था। विभाग ने कहा कि भारतीय सौर उत्पादों पर शुल्क लगाने से अमेरिकी सौर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा होगी।
भारतीय सौर उद्योग ने इस फैसले का विरोध किया है और कहा है कि यह फैसला भारतीय सौर उत्पादों के लिए हानिकारक होगा। भारतीय सौर उद्योग के अनुसार, अमेरिकी शुल्क लगाने से भारतीय सौर उत्पादों की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी मांग कम हो जाएगी। इस फैसले से भारतीय सौर उद्योग को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अमेरिका भारतीय सौर उत्पादों का एक बड़ा बाजार है। भारतीय सौर उद्योग ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेगा और अमेरिकी सरकार से शुल्क हटाने की मांग करेगा।
प्रभाव
अमेरिकी शुल्क लगाने से भारतीय सौर उद्योग पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। भारतीय सौर उत्पादों की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी मांग कम हो जाएगी। इससे भारतीय सौर उद्योग को नुकसान होगा और अमेरिकी सौर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
कंपनियों की प्रतिक्रिया
भारतीय सौर कंपनियों ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी। वीरम सोलर के सीएमडी ज्ञानेश चौधरी ने कहा, “हम इस फैसले से निराश हैं और हम इसका विरोध करेंगे।” वारी एनर्जीज के ग्रुप हेड फिनांस अभिषेक पारेख ने कहा, “हम इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे और अमेरिकी सरकार से शुल्क हटाने की मांग करेंगे।”
अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सरकार ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह फैसला अमेरिकी सौर उद्योग को बचाने के लिए लिया गया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के प्रवक्ता ने कहा, “हम इस फैसले पर कायम हैं और हम अमेरिकी सौर उद्योग को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”