नई दिल्ली :- दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शराब नीति से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के बाद राजनीतिक रूप से काफी आक्रामक नजर आए। फैसले के तुरंत बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ पूरा मामला सत्ता हासिल करने की योजना का हिस्सा था। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए किया गया।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि लंबे समय तक चले इस मामले ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की लेकिन सच्चाई आखिरकार सामने आ गई। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला यह साबित करता है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्य आधारित नहीं थे। उन्होंने अपने समर्थकों और आम जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोगों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना रहा।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा और विकास के मुद्दों पर काम करने वाली सरकार को रोकने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया गया। उनके अनुसार दिल्ली में किए गए शिक्षा सुधारों से कुछ राजनीतिक दल असहज थे इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया। सिसोदिया ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
बीजेपी की ओर से हालांकि इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार काम करती हैं और अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के बाद बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में इसका असर दिल्ली की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फैसले से आम आदमी पार्टी को राजनीतिक ऊर्जा मिल सकती है जबकि विपक्ष नई रणनीति बनाने में जुटेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा किस तरह जनता के बीच उठाया जाएगा।