Health bill बेंगलुरु:-कर्नाटक के प्रस्तावित स्वास्थ्य अधिकार विधेयक को लेकर कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह विधेयक स्वास्थ्य के अधिकार को मजबूत करने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दे सकता है।कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधेयक में ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य’ और ‘स्वास्थ्य सेवाओं’ की परिभाषाएं अस्पष्ट हैं और इसमें राज्य को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं किया गया है। उनका कहना है कि विधेयक का फOCUS ‘योग्य रोगियों’ और निजी संस्थानों पर है जो स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे सकता है।
कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि विधेयक में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर जोर दिया गया है, लेकिन इसके लिए मजबूत प्रवर्तन तंत्र नहीं है। उनका कहना है कि यह विधेयक स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे सकता है और लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार को कमजोर कर सकता है।कर्नाटक जन स्वास्थ्य चळवळी की अखिला वासन ने कहा, “यदि यह कानून स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राज्य की जिम्मेदारी को मजबूत नहीं करता है तो यह निजीकरण को बढ़ावा देने वाला एक ढांचा बन सकता है न कि स्वास्थ्य के अधिकार को सुनिश्चित करने वाला।”
कार्यकर्ताओं ने विधेयक में कई कानूनी खामियों की ओर भी किया है। उनका कहना है कि विधेयक में प्रस्तावित राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने और आपातकालीन सेवाओं के लिए अनुबंध करने की शक्ति दे सकता है जो स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दे सकता है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि विधेयक को मजबूत किया जाए और इसमें स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को रोकने के लिए प्रावधान किए जाएं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं एक सार्वजनिक वस्तु हैं और इसे निजी संस्थानों के हाथों में नहीं सौंपा जा सकता है।