Electricity worker safety सोनभद्र:-यूपी के सोनभद्र में एक संविदा लाइनमैन संतोष कुमार की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर से बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके काम करने की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संतोष कुमार, जो कि 13 हजार रुपये के मासिक भत्ते पर काम कर रहे थे, एक नए ट्रांसफार्मर को लगाने के लिए बिजली के खंभे पर चढ़े थे, तभी हाई वोल्टेज सप्लाई शुरू हो गई। संतोष को झटका लगा और वो खंभे से चिपक गए, जिससे उनके शरीर में आग लग गई। उनके साथी कर्मचारियों ने हेल्पर को फोन करके शट डाउन लिया और खंभे पर चढ़कर संतोष कुमार को नीचे उतारा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। संतोष की जान नहीं बच सकी।
यह घटना एक अकेली नहीं है, ऐसी घटनाएं रोज होती हैं। बिजली कर्मचारियों को बिना रबर शूल, ग्लब्स और जरूरी सुरक्षा उपकरण के काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें 13 हजार रुपये के मासिक भत्ते पर काम करना पड़ता है जो कि उनकी जान की कीमत नहीं है। यह सवाल उठता है कि क्या हमसे आगे की जो तीन अर्थव्यवस्थाएं हैं, वहां जान की कीमत इतनी सस्ती होगी? क्या वहां के कर्मचारी इतने कम वेतन पर काम करेंगे? नहीं, वहां के कर्मचारी को अच्छी सुरक्षा और वेतन मिलता है, क्योंकि वहां की सरकारें अपने कर्मचारियों की जान की कीमत समझती हैं।
लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है। हमारे देश में कर्मचारियों की जान की कीमत बहुत सस्ती है। उन्हें कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, और जब उनकी जान जाती है, तो सरकारें और विभाग सिर्फ बयान देते हैं और जांच की बात करते हैं। यह समय है जब हमें अपने कर्मचारियों की जान की कीमत समझनी होगी। हमें उन्हें अच्छी सुरक्षा और वेतन देना होगा, ताकि वे अपने काम को सुरक्षित और सम्मान के साथ कर सकें।