Zero Tolerance Drive /लखनऊ:- विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार की सख्ती का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है। साल 2026 के शुरुआती 52 दिनों में परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के दौरान प्रदेश भर में 1.21 लाख से अधिक ऐसे लोगों के चालान काटे गए, जो बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चला रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई केवल एक बानगी है; नशे में गाड़ी चलाने (Drink and Drive) वालों की संख्या और उनसे वसूला गया जुर्माना और भी अधिक सतर्क करने वाला है।
हेलमेट को लेकर लापरवाही बरकरार
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि 70% से अधिक मौतों का कारण सिर में लगने वाली चोट होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जनवरी 2026 से ही पूरे प्रदेश में ‘सड़क सुरक्षा माह’ और विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में AI-कैमरों और (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक की मदद से बिना हेलमेट वालों की पहचान की जा रही है। 20 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले हेलमेट न पहनने के कारण विभाग ने करोड़ों रुपये का राजस्व जुर्माने के रूप में वसूला है। अब केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित भी किए जा रहे हैं।
नशे में ड्राइविंग: मौत को दावत देते वाहन चालक
हेलमेट के बाद सबसे गंभीर स्थिति नशे में वाहन चलाने वालों की है। पुलिस द्वारा देर रात चलाए गए ‘इंटरसेप्टर’ अभियानों में सैकड़ों लोग ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए।
सख्त जुर्माना: नशे में पहली बार पकड़े जाने पर ₹10,000 का भारी जुर्माना और जेल तक की सजा का प्रावधान लागू किया गया है।
दोहरा अपराध: दूसरी बार पकड़े जाने पर यह जुर्माना ₹15,000 तक पहुंच जाता है और लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
यातायात निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारा मकसद राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है। नशे में गाड़ी चलाना न केवल चालक के लिए, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य निर्दोष लोगों के लिए भी जानलेवा है।”