Convocation Ceremony /नई दिल्ली:-देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने आज अपने 102वें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 1.2 लाख से अधिक छात्रों को स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी (PhD) की डिग्रियाँ प्रदान कीं। खचाखच भरे मल्टीपर्पज हॉल में आयोजित इस समारोह में छात्रों के चेहरों पर अपनी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने का उत्साह और भविष्य के सुनहरे सपनों की चमक साफ देखी गई।
उपराष्ट्रपति ने दी बधाई, कौशल विकास पर दिया जोर
समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद विशिष्ट अतिथियों ने मेधावी छात्रों को डिजिटल और फिजिकल दोनों रूपों में डिग्रियाँ वितरित कीं। संबोधन के दौरान वक्ताओं ने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र केवल डिग्री लेकर नहीं निकल रहे, बल्कि वे देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं।
बेटियों ने फिर गाड़े सफलता के झंडे
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में एक बार फिर छात्राओं (Female Students) का दबदबा देखने को मिला। स्वर्ण पदक (Gold Medal) और विशेष पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों की सूची में लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले काफी अधिक रही। विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक उत्कृष्टता में बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित किया कि वे हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। कई संकायों में टॉप करने वाली छात्राओं को स्टैंडिंग ओवेशन देकर सम्मानित किया गया।
डिजिटल डिग्री और ‘समर्थ’ पोर्टल का कमाल
कुलपति (Vice Chancellor) ने अपने वार्षिक प्रतिवेदन में बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने तकनीक के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। इस बार भी छात्रों को ‘डिजीलॉकर’ के माध्यम से डिजिटल डिग्रियाँ तुरंत उपलब्ध करा दी गईं, ताकि उन्हें नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए भौतिक कॉपी का इंतजार न करना पड़े। ‘समर्थ’ पोर्टल के जरिए पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया गया है।
प्रमुख आंकड़े और उपलब्धियां:
कुल डिग्रियाँ: 1,20,000+ (UG, PG, और Professional कोर्सेज)।
PhD डिग्री: इस साल रिकॉर्ड संख्या में शोधार्थियों को डॉक्टरेट की उपाधि दी गई।
स्वर्ण पदक: विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 150 से अधिक छात्रों को मेडल मिले।
नया ड्रेस कोड: पारंपरिक गाउन की जगह छात्रों ने भारतीय परिधानों (कुर्ता-पायजामा और साड़ी) में अपनी सांस्कृतिक पहचान को गौरवान्वित किया।
छात्रों और अभिभावकों का उत्साह
समारोह स्थल के बाहर का नजारा उत्सव जैसा था। छात्र अपनी ‘कॉन्वोकेशन कैप’ हवा में उछालकर अपनी सफलता का जश्न मनाते दिखे। कई छात्रों ने बताया कि कोविड के बाद के दौर में यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल है। एक शोधार्थी ने कहा, “यह डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और शोध का परिणाम है।”
भविष्य की राह
समारोह के अंत में कुलपति ने छात्रों को विदा करते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के द्वार अपने पूर्व छात्रों (Alumni) के लिए हमेशा खुले रहेंगे। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को न भूलें और नैतिक मूल्यों के साथ पेशेवर जीवन की शुरुआत करें।