End of an Era Iran/तेहरान:-पश्चिम एशिया के इतिहास में आज एक ऐसा पन्ना जुड़ गया है जिसने पूरी दुनिया की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। ईरान की सरकारी मीडिया (IRIB) ने रविवार सुबह आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (86) अब इस दुनिया में नहीं रहे। शनिवार तड़के अमेरिका और इस्राइल द्वारा तेहरान में किए गए भीषण हवाई हमलों में उनकी मृत्यु हो गई। ईरानी सरकार ने इस घटना के बाद देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। खामेनेई का निधन न केवल ईरान, बल्कि पूरे मुस्लिम जगत और वैश्विक कूटनीति के लिए एक युगांतकारी घटना है।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई?
अयातुल्ला अली खामेनेई आधुनिक इतिहास के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। 19 अप्रैल 1939 को मशहद में जन्मे खामेनेई ने अपना पूरा जीवन इस्लामी क्रांति और पश्चिमी ताकतों के विरोध में समर्पित कर दिया।
क्रांति के सिपाही: उन्होंने 1979 की इस्लामी क्रांति में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के साथ मिलकर पहलवी राजशाही को उखाड़ फेंकने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रपति से सर्वोच्च नेता तक: 1981 से 1989 तक उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। 1989 में खुमैनी की मृत्यु के बाद, वे ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) चुने गए।
असीमित शक्तियां: ईरान के संविधान के अनुसार, वे देश के ‘कमांडर-इन-चीफ’ थे। अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, न्यायपालिका और सेना—हर बड़े फैसले पर अंतिम मुहर उन्हीं की होती थी।
कैसा रहा 36 साल का कार्यकाल?
खामेनेई का शासनकाल चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने ईरान को एक क्षेत्रीय महाशक्ति बनाने के लिए परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल तकनीक पर जोर दिया।
अमेरिका से दुश्मनी: उनके पूरे शासन का केंद्र बिंदु ‘अमेरिका विरोध’ रहा। उन्होंने अमेरिका को ‘बड़ा शैतान’ करार दिया और कभी भी पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुके।
क्षेत्रीय प्रभाव: उनके नेतृत्व में ईरान ने इराक, सीरिया, लेबनान (हिजबुल्लाह) और यमन (हुती) में अपना प्रभाव फैलाया, जिसे ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ कहा जाता है।
कठोर शासन: देश के भीतर उन्होंने इस्लामी कानूनों को सख्ती से लागू किया। उनके कार्यकाल में कई बार जन-विद्रोह हुए (जैसे 2022 का हिजाब विरोध प्रदर्शन), लेकिन उन्होंने हर बार लोहे के हाथों से सत्ता पर पकड़ बनाए रखी।
कैसे हुआ हमला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार तड़के अमेरिका और इस्राइल ने ‘सर्जिकल प्रिसिजन’ के साथ तेहरान स्थित खामेनेई के कार्यालय और सुरक्षित आवास को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “आतंक के शासन का अंत” करार दिया है। हमले में खामेनेई के साथ उनके कई करीबी सलाहकार और सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं।
अब आगे क्या? ईरान का भविष्य क्या होगा?
खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान एक गहरे संवैधानिक संकट और अनिश्चितता के दौर में है।
उत्तराधिकार की जंग: ईरान के ‘विशेषज्ञों की परिषद’ (Assembly of Experts) अब नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करेगी। रेस में खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई और कुछ वरिष्ठ मौलवियों के नाम चर्चा में हैं।
सत्ता का वैक्यूम: सर्वोच्च नेता की अनुपस्थिति में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) सत्ता पर कब्जा कर सकती है, जिससे देश में सैन्य शासन का खतरा बढ़ गया है।
वैश्विक डर: क्या ईरान इस ‘हत्या’ का बदला लेने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा? यह सवाल पूरी दुनिया को डरा रहा है।