Geopolitical Volatility/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Mid-East) में बढ़ते तनाव और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या की खबरों के बीच एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ओवैसी ने ईरान पर हुए हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गहरे प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
“हत्या अवैध और अनैतिक”: ओवैसी का कड़ा रुख
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए इस घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को ‘अवैध और अनैतिक’ बताते हुए कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के नेता को इस तरह निशाना बनाना विश्व शांति के लिए खतरनाक संकेत है। ओवैसी ने तर्क दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और मानवीय गरिमा के विरुद्ध हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों और इजरायल (बिना नाम लिए या संदर्भानुसार) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं केवल कट्टरपंथ और अस्थिरता को बढ़ावा देंगी।
खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर जताई चिंता
राजनीतिक बयानबाजी से इतर, ओवैसी ने इस संघर्ष के मानवीय और आर्थिक पहलुओं पर भी केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मुख्य रूप से दो बड़ी चिंताओं को रेखांकित किया:
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा: ओवैसी ने कहा कि खाड़ी देशों (Gulf Countries) में लाखों भारतीय काम कर रहे हैं। अगर ईरान और उसके पड़ोस में युद्ध की स्थिति बनती है, तो इन भारतीयों की जान और आजीविका दोनों खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि वह वहां मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल आकस्मिक योजना (Contingency Plan) तैयार करे।
तेल की बढ़ती कीमतें: उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान पर हमलों और बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा क्योंकि ईंधन महंगा होने से महंगाई दर में भारी उछाल आने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और ओवैसी का तर्क
ओवैसी ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया को ‘जंगल राज’ की तरफ नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या शक्तिशाली देशों के लिए नियम अलग हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति केवल संवाद से आ सकती है हत्याओं और बमबारी से नहीं।
जनता की राय में बंटा सोशल मीडिया
ओवैसी के इस बयान के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बहस छिड़ गई है। जहां एक पक्ष इसे ‘सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय कानून’ पर आधारित सही स्टैंड मान रहा है, वहीं आलोचकों का कहना है कि यह ‘अनावश्यक टिप्पणी’ है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर ‘मुस्लिम वोटबैंक’ को साधने की कवायद के रूप में भी देख रहे हैं।
क्या होगा भारत पर असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण है। भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स दांव पर लगे हैं। ओवैसी द्वारा उठाए गए ‘तेल की कीमतों’ और ‘प्रवासियों की सुरक्षा’ के मुद्दे वास्तव में सरकार के लिए भी चिंता का विषय बने हुए हैं।