Shetty said /मुंबई:-बॉलीवुड के ‘अन्ना’ यानी सुनील शेट्टी अपने सीधे और स्पष्ट बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता ने फिल्म इंडस्ट्री के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों से बनाई जा रही नकारात्मक धारणा (Narrative) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सुनील शेट्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बॉलीवुड को केवल ‘ड्रग्स’ और ‘#MeToo’ के चश्मे से देखना पूरी तरह गलत है।
‘नैरेटिव के जरिए बदनाम करने की कोशिश‘
सुनील शेट्टी ने इंडस्ट्री का बचाव करते हुए कहा कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत बॉलीवुड के खिलाफ एक माहौल तैयार किया गया है। उन्होंने कहा: “आजकल यह नैरेटिव सेट कर दिया गया है कि बॉलीवुड में केवल ड्रग्स चलते हैं या यहाँ केवल #MeToo जैसे मामले ही होते हैं। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूँ कि ‘ऐसा नहीं है’। हर क्षेत्र की तरह यहाँ भी कुछ कमियां हो सकती हैं, लेकिन पूरी इंडस्ट्री को अपराधी की तरह पेश करना गलत है।सुनील शेट्टी का मानना है कि बॉलीवुड लाखों लोगों को रोजगार देता है और दुनिया भर में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन कुछ नकारात्मक घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से इसकी गरिमा को ठेस पहुंची है।
ड्रग्स विवाद पर बोले अभिनेता
सुनील शेट्टी ने उन आरोपों पर भी बात की जिनमें बॉलीवुड को ड्रग्स का गढ़ बताया जाता है। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग अपनी सेहत और फिटनेस को लेकर बहुत सजग रहते हैं। “हम दिन-रात मेहनत करते हैं। अगर पूरी इंडस्ट्री वैसी होती जैसा दिखाया जा रहा है, तो हम इतना काम कैसे कर पाते? फिटनेस और अनुशासन के बिना इस चमक-धमक वाली दुनिया में टिकना मुमकिन नहीं है। कुछ लोगों की गलतियों की सजा पूरे परिवार (इंडस्ट्री) को नहीं दी जा सकती।”
#मैं भी(MeTo) और महिलाओं की सुरक्षा
कास्टिंग काउच और #मैं भी (MeToo) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बात करते हुए शेट्टी ने कहा कि इंडस्ट्री अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और पेशेवर हो गई है। उन्होंने जोर दिया कि अब सेट पर कड़े नियम हैं और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। उनके अनुसार, “सिर्फ हेडलाइंस बनाने के लिए पुराने मामलों को बार-बार उछालकर यह दिखाना कि यहाँ सब कुछ खराब है, उन हजारों लोगों के साथ नाइंसाफी है जो यहाँ ईमानदारी से काम कर रहे हैं।”
सोशल मीडिया और बॉयकॉट ट्रेंड पर चिंता
अभिनेता ने सोशल मीडिया पर चलने वाले ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ ट्रेंड पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दर्शकों को यह समझने की जरूरत है कि फिल्म बनाना एक टीम वर्क जिसमें स्पॉटबॉय से लेकर लाइटमैन तक की मेहनत शामिल होती है। नफरत भरा नैरेटिव सेट करने से इन छोटे कामगारों के चूल्हे बुझ जाते हैं उन्होंने सरकार और जनता से अपील की कि वे बॉलीवुड को उसके रचनात्मक योगदान के लिए पहचानें, न कि केवल विवादों के लिए।