Divine guidance : “यथार्थ गीता” मात्र ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला

Divine guidance सिंगरौली (मध्य प्रदेश):- मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के अंतर्गत चितरंगी तहसील के क्योटली ग्राम स्थित ‘ॐ श्री परमहंस आश्रम बैकुंठ धाम, परोनिया’ में दो दिवसीय भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में यथार्थ गीता का अखंड पाठ, संगीतमय सुंदरकांड और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

भजन और साधना ही जीवन का आधार: संत अच्युतानंद जी महाराज

आयोजन के मुख्य आकर्षण के रूप में परम पूज्य संत अच्युतानंद जी महाराज और संत अच्छिदानंद जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। भक्तों को संबोधित करते हुए संत अच्छीदानंद जी ने कहा कि भगवान की वाणी को योगेश्वर महाप्रभु स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने ‘यथार्थ गीता’ के रूप में क्रमबद्ध और सरल तरीके से लिपिबद्ध किया है।उन्होंने जोर देकर कहा कि आराधना का प्रथम सोपान एक तत्वदर्शी महापुरुष के सानिध्य में भजन की विधि सीखना है। महाराज जी ने बताया कि यदि भक्त का विश्वास अडिग हो, तो भगवान स्वप्न या अन्य संकेतों के माध्यम से अपने भक्त का मार्गदर्शन स्वयं करते हैं।

दो दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा

प्रथम दिन (28 फरवरी 2026): कार्यक्रम का शुभारंभ यथार्थ गीता के अखंड पाठ से हुआ। आश्रम परिसर गीता के श्लोकों से गुंजायमान रहा, जिसके पश्चात उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया।

द्वितीय दिन (1 मार्च 2026): दूसरे दिन की शुरुआत बाबुलदा की संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत संगीतमय सुंदरकांड से हुई। मधुर भजनों और कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात स्वामी श्री रामरक्षा नंद जी महाराज द्वारा अमृतमयी सत्संग एवं प्रवचन दिया गया।

यथार्थ गीता: जाति और संप्रदाय से ऊपर का सत्य

स्वामी श्री रामरक्षा नंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में ‘यथार्थ गीता’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ग्रंथ किसी विशेष मत, मजहब या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानव जाति का धर्मशास्त्र है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने स्वयं स्पष्ट किया है:

“गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रसंग्रहैः। या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिः सृता।।” अर्थात, जो वाणी स्वयं भगवान के श्रीमुख से निकली है, उसे हृदय में धारण करने के बाद किसी अन्य शास्त्र के संग्रह की आवश्यकता नहीं रह जाती।

स्वामी जी ने आगे बताया कि यथार्थ गीता ऊंच-नीच, छुआछूत और अमीर-गरीब जैसी घृणित भावनाओं से परे है। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि हर घर में यथार्थ गीता का पाठ होना चाहिए ताकि मस्तिष्क से धार्मिक विकृतियों का कचरा साफ हो सके और मनुष्य को मोक्ष मार्ग की सही जानकारी मिल सके।

विशाल भंडारे के साथ समापन

कार्यक्रम के अंत में आश्रम की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। विश्व गुरु परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की असीम कृपा से संपन्न हुए इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया है। भक्तों ने एकाग्र मन से सत्संग श्रवण किया और स्वयं को धन्य माना।

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